सूना पथ
सूना पथ
सुनसान अविचल
धूप में नहाता हुआ,
अकेला चिल्ला-चिल्लाकर
पथिक तुझे पुकार रहा।
कंकड़ धूप से हुए हैं लाल
पगों को कर देंगे बेहाल
फिर भी बढ़ना तो पड़ेगा
क्या गर्मी, क्या वर्षाकाल
ऋतुओं का ये हेर-फेर
तन को जैसे दुत्कार रहा
अकेला चिल्ला-चिल्लाकर
पथिक तुझे पुकार रहा।
आंख मिचौली करने को
जो इन पर है बढ रहा
अकेला चिल्ला-चिल्लाकर
पथिक तुझे पुकार रहा।
-ः0ः-

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